चल उसे मनाने चले…

ऐ दिल, चल उसे मनाने चले,
जिसके बिना एक पल जैसे ज़माने चले।

दो दिन की नाराज़गी काफी है उससे,
जिसके साथ जाने कबसे तेरे फ़साने चले।

वो इश्क़ भला फिर क्या इश्क़ हुआ कि,
यार मुँह फेरे, अलग दीवाने चले।

बात कर, बात यकीनन बढ़ेगी,
तन्हाई में क्या बात, किसको बताने चले?

रूठा हुआ है दिल यहाँ खुद ही से खुद का,
ऐसे में फिर कौन किसे हँसाने चले।

भला दूर रहकर उससे तू रह पाएगा कभी,
कहाँ तू, कहाँ तेरे तराने चले।

छोड़ अब अपनी शायरी, ये सब किसके लिए,
जब वो ही नहीं पास तेरे,
किसके दामन में तू आँसू बहाने चले???

ढूंढता रहा…

ता उम्र फकत एक ख़्वाब ढूंढता रहा,
हमसफर, ऐ ज़िन्दगी, तुझसे खराब ढूंढता रहा।

जाने कितनी ही महजबीन आई मेरे सामने,
और मैं आसमां में माहताब ढूढ़ता रहा।

अनगिनत ही मिलते रहे जाम मुझको इश्क़ के,
और मैं बदनसीब मयखानों में शराब ढूंढता रहा।

हर कतरा उसकी दीद का समंदर से कम न था,
और मैं गैरों के हुस्न के तालाब ढूंढता रहा।

सूरतें तूने तो ज़िन्दगी साफ ही दिखलाई थी,
मैं जाने फिर क्यों सूरतों पे नकाब ढूंढता रहा।

मुझपे अपनी इनायत तूने तो बेहिसाब की थी,
पर मैं तेरे एहसानों का हिसाब ढूंढता रहा।

बुलाती रही तू मुझे बेखुद होकर आगोश में,
मैं ज़माने की धूप में ताब ढूंढता रहा।

ये फ़साना भी एक सच्चाई है मेरी,
ज़िंदा रह कर भी ज़िन्दगी जनाब ढूंढता रहा।

आहिस्ता चल…

ए दिल, इतनी भी क्या जल्दी पड़ी है, आहिस्ता चल,
उम्र काटने को सारी उम्र पड़ी है, आहिस्ता चल।

यूं तो इल्म है मुझे उसके इरादों का,
ज़िन्दगी खंजर लिए आगे खड़ी है, आहिस्ता चल।

सामने अनजाने, पीछे अध-सुलझे सवाल,
किधर जाऊँ, मुश्किल बड़ी है, आहिस्ता चल।

मेरे ख़यालों में उसका ज़िक्र और उसका मेरे ख़यालों पे सवाल,
दरमियाँ कुछ तो गड़बड़ी है, आहिस्ता चल।

वाकिफ हूँ मैं भी मंज़िल-ए-आदम से,
सुस्ता लूँ कुछ देर, थकान बड़ी है, आहिस्ता चल।

मोड़ पे सुना है मेरे इंतेज़ार में हैं कई,
यकीनन उनके पास इल्ज़ामों की लड़ी है, आहिस्ता चल।

बस अब और नहीं चाह साक़ी-ए-कौसर की,
उसके इश्क़ की खुमारी अब तक चढ़ी है, आहिस्ता चल।

वो इश्क़…

वो इश्क़ भी क्या जो भुलाने से भुला जाए,
वो यार ही क्या जो वादा करे और आ जाए।

मुहब्बत तो मुकम्मल है सिर्फ तभी,
जब रोज़ दिखे वो और रोज़ ही भा जाए।

फिर कौन खुमारी हो किसी शराब से,
इक बार जो अपने हाथों से वो पिला जाए।

क्या ख्वाइश रखे दो जहानों की,
गर कोई शख्स उसे पा जाए।

आदतन जो उसके सजदे करते थे,
कोई बताए, उसके बिना अब कैसे रहा जाए।

इश्क़ भी करें और इज़हार की मनाही,
ऐसे सितम को उसके किससे कहा जाए।

ऐसा भी वक़्त न दिखा ऐ संग-दिल,
न तू रो पाए, न मुझसे सहा जाए।

चल छोड़ ए दिल उसके आने की उम्मीद,
अपनी गर्द में ही चल फिर चला जाए।

अनजान कर देते हैं वो…

उसे रकीब के साथ देखने की आदत हो गयी,
ताज्जुब होता है जब मेरी बात कर देते हैं वो।

जानता हूँ मैं यूँ तो, कोई राब्ता नहीं अब,
फिर क्यों मेरा नाम आते ही आँखें भर लेते हैं वो।

बात निकले मेरी और खामोश रहे लब उनके,
कई बार ये नज़राना भी मगर देते हैं वो।

रातों में अक्सर हिचकियाँ आती हैं मुझे,
दबी आवाज़ में शायद मेरा नाम लेते हैं वो।

सदाएं मेरी चाहे न पहुँचे उन तक, जानता हूँ,
अक्सर लेकिन मुझे आवाज़ देते हैं वो।

मेरा नाम उनकी किताब के किसी पन्ने में ज़रूर होगा,
यूँ ही नहीं आशिक़ों को मेरी मिसाल देते हैं वो।

आएंगे किसी रोज़ रोते हुए मेरे ही दर पर,
जो आज मुझे जान कर अनजान कर देते हैं वो।

बातूनी आँखें…

बातूनी हैं तेरी आँखें,
कभी चुप रहती नहीं,
पर लबों से न जाने तू,
कभी कुछ कहती नहीं।

तेरे सुर्ख रुखसार,
तेरी हया बताते हैं,
झुकी पलकें तेरी,
तेरा इश्क़ जताते हैं।
फिर क्यों मेरी याद में,
तेरी आँखें बहती नहीं,
तेरे दिल में जो है,
तू कभी कुछ कहती नहीं।

मेरे जिस्म पर तेरे निशान,
तेरी दीवानगी दिखाते हैं,
मेरे ये लफ्ज़ अक्सर,
तुझे ही तो बुलाते हैं।
तेरा मुझसे नाराज़ होना,
मेरी धड़कनें सहती नहीं,
बातूनी हैं तेरी आँखें,
कभी चुप रहती नहीं।

ए वक़्त, रुक जा…

ऐ वक़्त, रुक ही जा तू यहाँ,
उसे जाने न दे जहाँ,
न पहुँचेगी मेरी बात कभी,
न आएगी उसे फिर याद कभी।

क्या पता फिर कभी मुलाक़ात न हो,
क्या पता फिर कभी ये रात न हो,
क्या पता उसके कोई नज़दीक आए,
कौन जाने फिर वो कभी वापिस न आए।

मेरी खामियाँ गर किसी की खासियत हो,
हँसा दे बस यूं ही, ऐसी शख्सियत हो,
मुझसे फिर मेरी मोहब्बत का भी हिसाब मांगा जाएगा,
क्या ही पता कि मुझसे बात करना भी टाला जाएगा।

वाकिफ हूँ, उसके हर पल में मैं शामिल नहीं,
तो क्या हुआ गर उसके बगैर मैं कामिल नहीं,
उसने तो साथ निभाने का कोई वादा नहीं किया,
मैं ही रहूँ काबिज़ दिल में, इरादा नहीं किया।

मैं नहीं मानता इश्क़ के इन पुराने रिवाज़ों को,
“जाने देना ही मोहब्बत है”, ऐसे ज़िक्र-ओ-किताबों को,
मुझे तो फकत उससे ही मतलब है,
साथ रहे हमेशा, बस यही ज़रूरत है।

मेरा दिल हमेशा उसके नाम पे खुदगर्ज़ रहेगा,
चाहे कुछ हो, बस यही एक चीज़ कहेगा,
कि ए वक़्त, होगा एहसान तेरा जो तू यहीं रुक जाएगा,
कल क्योंकि मुझे पता है, मेरा यार चला जाएगा।